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Poem on Water in Hindi || 3+ बेस्ट जल सुरक्षा पर कविता

Poem on Water in Hindi:- नमस्कार दोस्तों आज हम आप सभी के लिए एक जरुरी सुचना वे जानकारी पर आर्टिकल लाये है। मित्रो आज हमने जल संरक्षण पर आर्टिकल लिखा है। ताकि इस दुनिया में जो अंधाधुन्द जल की बर्बादी हो रही है। उसकी रोक थाम के लिए हमे यहां कुछ शानदार कविताओं का संग्रह शेयर किया है। ताकि आप जल की बर्बादी ना करे उसे बचा कर रेक जल का इस्तमाल जरुरत पड़ने पर ही ले उसे फालतू इधर उधर न फैलाये। मित्रो मुझे उम्मीद है की आपको हमारा जल पर लिखा ब्लॉग पोस्ट जरूर पसंद आएगा। धन्यवाद। 

Poem on Water in Hindi – जल ही जीवन है कविता 

Save Water Kavita in Hindi – जल प्रदूषण कविता

मैं तुम्हें मेरे लिए पानी की तरह कम होते देख रहा हूँ।

मेरे गेहूँ की जड़ों के लिए तुम्हारा कम पड़ जाना
मेरी चिड़ियों के नहाने के लिए तुम्हारा कम पड़ जाना
मेरे पानी माँगते राहगीर के लिए तुम्हारा ग़ायब हो जाना
मेरे बैल का तुम्हारे पोखर पर आकर सूनी आँखों से इधर-उधर झाँकना
मेरी आटा गूंधती स्त्री के घड़े में तुम्हारा नीचे सरक जाना।

तुम्हारे व्यवहार में मैं यह सब होते देख रहा हूँ।

लगातार कम होते पानी की तरह
मैं तुम्हें मेरे लिए कम होते देख रहा हूँ।

पानी रहित हो रहे इलाकों की तरह
मैं पूछ भी नहीं पा रहा हूँ
क्यों हो रहा है ऐसा?
पानी तुम क्यों कर रहे हो ऐसा?

पानी चला गया तो नदी किसके पास गई कुछ कहने
वैसी नदी की तरह लीन हूँ मैं अपने में।

नदी के बहाव की सूखी रेत में सुदूर तक फैले आक की तरह
अभी भी तुम्हारी याद का हरा बचा हुआ मुझ में।


पानी की तरह कम तुम (Poem on Jal in Hindi)

Hindi Poem on Water

पानी बहता है
चाहे कहीं भी हो पानी
वह बह रहा है।

पत्‍तेे पर रखा बूँद बह रहा है
बादल में भी पानी बह रहा है।

झील-कुआँ का पानी
बहने के सिवा और वहाँ
कर क्‍या रहा होता है!

गिलास में रखा पानी भी
दरअसल बह रहा है।

घूँट में भी पानी
बह कर ही तो पहुँचता है प्‍यास तक।

सूख रहा पानी भी बह रहा है
अपने पानीपन के लिए।

मेरे शब्‍दो! तुम्‍हारे भीतर भी तो
बह रहा है स्‍वर-जल
नहीं तो कहना कैसे होता प्रांजल।

पानी बहता है
तभी तक पानी
पानी रहता है!


Short Poem on Water in Hindi

सदा हमें समझाए नानी,
नहीं व्यर्थ बहाओ पानी।
हुआ समाप्त अगर धरा से,
मिट जायेगी ये ज़िंदगानी।

नहीं उगेगा दाना-दुनका,
हो जायेंगे खेत वीरान।
उपजाऊ जो लगती धरती,
बन जायेगी रेगिस्तान।

हरी-भरी जहाँ होती धरती,
वहीं आते बादल उपकारी।
खूब गरजते, खूब चमकते,
और करते वर्षा भारी।

हरा-भरा रखो इस जग को,
वृक्ष तुम खूब लगाओ।
पानी है अनमोल रत्न,
तुम एक-एक बूँद बचाओ।

 

हां तो मित्रो आपको हमारा हमारी पोस्ट poem on water in hindi पर जल जनरक्षण की ये प्रसिद्ध कविताये पढ़कर केस लगा। दोस्तों आजकी हमारी पोस्ट का यही उदेश्य था की आप झा भी हो हमेषा जल को बचा कर रखे जल की बर्बादी आने वाले कल को आमंत्रित करती है। इसलिए आज हमने आपके समक्ष ये पेश किया था। अगर हमारा लेख अच्छा लगा हो तो शेयर करना ना भूले।

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